सारंगढ़,किसान है परेशान,पटवारियों के कारनामों से….भाग१

सारंगढ़ / सारंगढ़ राजस्व अंतर्गत आने वाले सभी किसान पटवारियों से है परेशान आपको बता दें,सभी पटवारी अपने हल्का को छोड़कर खुद का निजी कार्यालय खोल कर बैठे हैं,जैसे डॉ निजी क्लीनिक खोल कर बैठे है ठीक उसी तरह सारंगढ़ स्थित सभी पटवारी अपने निजी कार्यालय खोल रखें है। जिससे किसानों को सारंगढ़ पटवारी के निजी कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है, कई किसान बुजुर्ग ऐसे भी है। जिनको सारंगढ आने-जाने में दूसरे लोगों की मदद की जरूरत होता है और जो किसान सारँगढ़ पटवारी के निजी कार्यालय नही पहुँच पाते उनका पंजीयन ही नही हो पाता है! क्योंकि किसान पटवारी के निजी दफ्तर का चक्कर काटते रह जाते है। वही सभी हल्का नंबर में सरकार पटवारी भवन बना रखा है जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना न पड़े। लेकिन पटवारियों के करतूत यह है कि निजी दफ्तर में किसानों को बुला कर पंजीयन,खाता दुरुस्ती या अन्य कामों के पैसा वसूल सके! सरकार ने अन्य दफ्तरों की तरह पटवारीयों के लिए भी पटवारी भवन बना रखे है बावजूद पटवारी अपने हल्का से नदारत रहतें है!
यही नही कई पटवारी ऐसे भी है जो काम करने के लिए मंथली वेतन पर असिस्टेंट रखें हुए है, अब सोचने वाली बात यह है कि असिस्टेंट को मंथली वेतन देने के लिए पैसा कहां से आता है! क्या पटवारी अपने वेतन से भुगतान करता है या फिर किसानों से पैसा लेकर?


पटवारी के असिस्टेंट से किसानों को भुगतना पड़ सकता है बड़ा खामियाजा…..
आपको बता दें जमीन बटवारा में भाई-भाईका नहीं होता न ही बाप बेटे का ऐसे में अगर पटवारी का असिस्टेंट से गलती से किसी किसान का रखबा कट जाए उस स्थिति में क्या होगा? पटवारी एक किराए के व्यक्ति को सरकारी काम काज व राजस्व में दखल देने में कोई कसर नही छोड़ रहे!
पटवारीयों की लापरवाही छति पहुँचा सकता है स्थानीय विधायक व सरकार को…
आपको बता दें गाँव मे बड़े बुजुर्ग किसानों को उनके कोई भी काम नही होने या काम संबंधित तखलीफ़ परेशानी होता है तो सीधा सरकार के ऊपर आरोप लगाते है या स्थानीय विधायक,नेताओं के ऊपर आरोप लगाते है कि ये सरकार या इनके सरकार में कोई काम नही हो पा रहा है! यहाँ पर भी कुछ ऐसा ही है पटवारीयों की लापरवाही से किसानों को मिलों दूर चल कर जाना पड़ रहा है जहाँ पर सारंगढ पटवारी अपने हल्का क्षेत्र को छोड़कर निजी दफ्तर खोल रखें है जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।




