एनटीपीसी के प्रभावित किसान मांगें पूरी नहीं होने से नाराज

तिलाइपाली खदान में कोयला खनन-परिवहन किया पूरी तरह ठप्प
रायगढ़:- रायगढ जिले के घरघोड़ा तहसील क्षेत्र में स्थापित ntpc खदान प्रभावित किसान लगभग दो बरस से पुनर्वास नीति के अनुसार अपनी माँग पूरी होने की बाट जोह रहे हैं।
लेकिन लम्बे समय से प्रतीक्षा रत एनटीपीसी तिलाइपाली प्रभावित किसानों के सब्र का बाँध अब टूटने लगा है। जिला प्रशासन और एनटीपीसी को पांच दिन पहले दिए गए ज्ञापन की मियाद खत्म हो जाने पर आज प्रभावित किसानों ने एनटीपीसी तिलाइपाली में कोयला खनन और परिवहन पूरी तरह बन्द करा दिया गया है।

विदित हो कि पाँच दिन पूर्व एनटीपीसी तिलाइपाली के प्रभावित किसानों ने जिला कलेक्टर के नाम घरघोड़ा एसडीएम को तीन सूत्रीय मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा था। जिसमे एक मुश्त मुआवजा राशि, वर्तमान में 18 वर्ष की आयु वालों को पुनर्वास का लाभ और प्रभावित लोगों को योग्यतानुसार स्थायी नौकरी दिए जाने की मांग की गई थी तथा मांग पूरी न होने पर तीन दिनों बाद पूरी तरह से काम बंद कराने का अल्टीमेटम दिया था। परंतु किसानों द्वारा दिये ज्ञापन को स्थानीय प्रशासन व एनटीपीसी प्रबन्धन ने हल्के में लेते हुए किसानों की मांगो पर तय समय में विचार नही किया। नतीज़तन आज किसानों ने बिछीनारा के पास खनन पॉइंट को बंद करा दिया, साथ ही रायकेरा के पास खदान गेट से परिवहन करने वाली गाड़ियों को रोक दिया गया।

किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए जिला कलेक्टर भीम सिंह ने विगत 6 जनवरी को तिलाइपाली पहुंचकर कम्पनी के महाप्रबंधक रमेश खेर सहित अन्य अधिकारियों की बैठक ली थी और प्रभावित किसानों से चर्चा कर उनकी समस्याओं के शीघ्र निराकरण के लिए एनटीपीसी प्रबंधन और घरघोड़ा एसडीएम को निर्देशित किया था। परंतु 6 महीने बीत जाने के बाद भी किसानों की समस्याएं ज़स की तस बनी हुई है। देखा जाए तो इन्हीं गरीब, आदिवासी ग्रामीणों की जमीनो से रोज़ करोड़ों का कोयला निकालने वाली महारत्न कंपनी प्रबन्धन इन्हीं किसानों के साथ तानाशाही पूर्ण रवैया अख्तियार किए हुए है। इसलिए अब कम्पनी के ख़िलाफ़ पूरे क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि आज प्रभावित किसानों के समर्थन में क्षेत्र के आम लोगो ने भी बड़ी संख्या में एनटीपीसी गेट के पास पहुँच कर मांगें पूरी होने तक कोयला का खनन व परिवहन का काम पूरी तरह बंद करा दिया है। फ़िलहाल समाचार लिखे जाने तक कम्पनी प्रबंधन या स्थानीय प्रशासन द्वारा आंदोलन खत्म कराने के लिए कोई पहल नहीं की गई है इसे देखकर लगता है कि प्रभावितों का आंदोलन अभी लंबा चलेगा।।




