घरघोड़ा

जमीन की धोखाधड़ी का मामला, एसडीएम और सांसद से लगाई गुहार।

घरघोड़ा : ग्राम झरियापाली निवासी सायबानी कोलता ने जमीन धोखाधड़ी के मामले में न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने एसडीएम व क्षेत्रीय सांसद को आवेदन देकर अपने पिता की भूमि को लेकर किए गए कुटरचित दस्तावेजों की शिकायत की है।

सायबानी ने अपने आवेदन में बताया कि उनकी जमीन खसरा नंबर 33/3 पर उनके पिता समारू के नाम से है। समारू, जो कि अत्यंत वृद्ध और अस्वस्थ हैं, को ग्राम निवासी कैलाश दासे और बिज्जु शर्मा ने बहला-फुसलाकर बैंक ले जाकर 5,000 रुपये निकाले और फिर उनसे तहसील कार्यालय में जमीन से जुड़े कागजातों पर दस्तखत करवा लिए।

सायबानी ने आरोप लगाया कि कैलाश दासे और बिज्जु शर्मा ने कुटरचित दस्तावेज बनाकर जमीन को अडाणी कंपनी को बेचने की साजिश रची है। यह भी बताया गया कि उक्त खसरा नंबर की जमीन के पास अडाणी कंपनी का एक बड़ा प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जिससे भूमि का मूल्य बढ़ गया है।

सायबानी का कहना है कि उनके पिता को सुनने की समस्या है और उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति का फायदा उठाकर यह धोखाधड़ी की गई। उन्होंने बताया कि एक अडाणी कंपनी का कर्मचारी किशोर पटनायक भी इस साजिश में शामिल है। उनके पिता से कोरे कागजों और स्टांप पर हस्ताक्षर करवाए गए।

सायबानी ने अधिकारियों से अपील की है कि उनके पिता के नाम की जमीन के दस्तावेज वापस दिलाए जाएं और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। यह भूमि उनके परिवार के जीविकोपार्जन का एकमात्र साधन है, जिसे वे किसी भी कीमत पर बेचना नहीं चाहते।

स्थानीय प्रशासन की भूमिका:
इस मामले में तहसीलदार, पटवारी और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सायबानी ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दी जाए।

पीड़ित पक्ष ने स्थानीय थाना प्रभारी को सूचित करते हुए पुलिस अधीक्षक से भी न्याय की अपील की है। सूत्रों के अनुसार यह भी पता चला है कि अब जिले के कलेक्टर को मामले की जांच के लिए निवेदन करने की तैयारी की जा रही है।

ग्रामीणों में रोष:
इस घटना से क्षेत्रीय ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा गरीब और असहाय लोगों के साथ इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए घातक है।

अधिकारियों का बयान:
एसडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच का आश्वासन दिया है। क्षेत्रीय सांसद को भी मामले से अवगत कराया गया है।

निष्कर्ष:
यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती जमीन की धोखाधड़ी को उजागर करता है। जरूरत है कि प्रशासन त्वरित कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए और दोषियों को सजा दे।

KRISHNA MAHILANE

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