नियमों को ठेंगा: सारंगढ़ वन विभाग के माजरमाटी में धड़ल्ले से चल रही JCB, बीट गार्ड बोले-“तालाब गहरीकरण में तो चलता ही है!

सारंगढ़, सर्किल माजरमाटी (वन परिक्षेत्र)।
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, वन विभाग के इस कक्ष क्रमांक -1001 में वन्यप्राणियों और जल संरक्षण के लिए चल रहे तालाब गहरीकरण कार्य में मजदूरों की जगह खुलेआम JCB मशीन से खुदाई कराई जा रही है। यह कार्य (रेगुलर) मद से कराया जा रहा है।
बीट गार्ड का गैर-जिम्मेदाराना बयान: “यहाँ तो चलता ही है”
जब वन विभाग के इस अवैध कार्य को लेकर स्थानीय बीट गार्ड हेमंत साव से बात की गई, तो उनका जवाब अचंभित करने वाला और विभागीय लापरवाही को उजागर करने वाला था। बीट गार्ड ने बड़ी ही बेबाकी से कहा, “तालाब गहरीकरण में तो JCB चलता ही है।”
एक जिम्मेदार वन कर्मी का यह बयान यह साबित करने के लिए काफी है कि वन क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर किस तरह भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्या बीट गार्ड को शासन और वन विभाग के कड़े नियमों की जानकारी नहीं है, या फिर यह सब किसी बड़ी ‘साठगांठ’ का हिस्सा है?
वन क्षेत्रों में मशीनों पर सख्त रोक।
वन विभाग के भीतर मनरेगा के तहत किए जाने वाले तालाब गहरीकरण या किसी भी कार्य में JCB जैसी भारी मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह काम पूरी तरह मानव श्रम (मजदूरों) से होना अनिवार्य है।
बिना अनुमति अवैध कार्य
बिना उचित प्रशासनिक स्वीकृति और बिना वन विभाग के तकनीकी मापदंडों के मशीनों से की गई खुदाई को अवैध और वन्यजीव अधिनियमों के सिद्धांतों के विपरीत माना जाता है
जल संरक्षण और वन पर्यावरण को भारी नुकसान।
वन क्षेत्रों में मशीनों से अंधाधुंध और अनियंत्रित खुदाई करने से न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि जंगल के शांत वातावरण और वन्यप्राणियों के प्राकृतिक आवास को भी नुकसान पहुंच रहा है। जल संरक्षण के नाम पर किया जा रहा यह कार्य, वैज्ञानिक मापदंडों को दरकिनार करने के कारण भूजल स्तर को सुधारने के बजाय पर्यावरण को बिगाड़ रहा है।
बड़ा सवाल
जहाँ एक तरफ गरीब वनवासी और ग्रामीण काम के लिए दर-दर भटक रहे हैं, वहीं वन विभाग की निगरानी में मशीनों के जरिए ठेकेदारों की जेबें भरी जा रही हैं। आखिर वन विभाग का उच्च प्रबंधन इस खुली मनमानी को कब तक अनदेखा करता रहेगा? क्या दोषी बीट गार्ड हेमंत साव और इस खेल के पीछे शामिल बड़े अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी, या फिर कागजी खानापूर्ति कर मामले को हमेशा की तरह दबा दिया जाएगा?



