सारंगढ

सफेद चावल का काला खेल: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में ‘खंडा’ बांट रही सरकार, क्या सेटिंग में डूबा है विभाग?

सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि वह प्रदेश के गरीब राशनकार्ड धारकों को 41 रुपये प्रति किलो की लागत वाला चावल उपलब्ध करा रही है, लेकिन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सारंगढ़, बिलाईगढ़,बरमकेला ब्लॉक में यह ‘परोपकार’ एक बड़े घोटाले और लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। उचित मूल्य की दुकानों पर पहुँच रहा मिश्रण ‘खंडा’ (टूटा हुआ) चावल न केवल हितग्राहियों के थाली का स्वाद बिगाड़ रहा है, बल्कि खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा रहा है।

बाजार में ‘शाही’, राशन में ‘रद्दी’

जमीनी हकीकत यह है कि जिस दर का हवाला देकर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है, उसी दर के आसपास खुले बाजार में HMT (पतला ) जैसा बेहतरीन और साबुत चावल उपलब्ध है। विडंबना देखिए कि सरकारी दुकानों में निम्न स्तर का टूटा हुआ चावल खपाया जा रहा है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब पैसा जनता का है, तो उन्हें ‘पशु आहार’ जैसा चावल क्यों परोसा जा रहा है?

क्वालिटी इंस्पेक्टर: रक्षक या भक्षक?

इस पूरे खेल में सबसे संदिग्ध भूमिका गुणवत्ता निरीक्षक (Quality Inspector) की नजर आ रही है। जनता सवाल पूछ रही है:

1/ क्या क्वालिटी इंस्पेक्टर की आंखों पर पट्टी बंधी है या ‘कमीशन’ का चश्मा चढ़ा है?
2/  खंडा मिश्रण वाले चावल को पास कर दुकानों तक भेजने की अनुमति किसने और क्यों दी?
3/ क्या वेयरहाउस से लेकर दुकानों तक पहुँचने वाले इस चावल की जांच सिर्फ कागजों पर हो रही है?

साफ है कि अधिकारियों की कथित मिलीभगत के बिना इतना घटिया चावल सिस्टम में प्रवेश नहीं कर सकता।

दोहरी मार: घटिया चावल और कालाबाजारी

मामला सिर्फ गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। सरकारी तंत्र की विफलता का फायदा कुछ कार्डधारी भी उठा रहे हैं। घटिया चावल मिलने के कारण कई लोग इसे 21 से 23 रुपये प्रति किलो में बिचौलियों को बेच रहे हैं। सरकार की योजना का यह ‘सर्कुलेशन’ भ्रष्टाचार की नई गाथा लिख रहा है। जरूरतमंदों को ढंग का अनाज नहीं मिल रहा और सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लग रही है।

आक्रोशित स्थानीय निवासी…..
यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के हक पर डाका है। जब सरकार लगभग 41 रुपये की दर का दावा करती है, तो थाली में खंडा चावल क्यों? इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

सरकार के लोक-लुभावन दावों और धरातल की कड़वी सच्चाई के बीच की खाई गहरी होती जा रही है। यदि प्रशासन ने जल्द ही गुणवत्ता की जांच कर ‘खंडा सिंडिकेट‘ पर नकेल नहीं कसी, तो आम जनता का भरोसा सरकारी योजनाओं से पूरी तरह उठ जाएगा।

मांग स्पष्ट है– चावल की सप्लाई चेन की उच्च स्तरीय जांच हो और घटिया क्वालिटी को ‘OK’ रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए।

KRISHNA MAHILANE

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