वन विभाग की लापरवाही, बारिश में कीचड़ से ग्रामीण परेशान

सारंगढ़-बिलाईगढ़।-
जनपद पंचायत बरमकेला के अंतर्गत ग्राम पंचायत चांटीपाली से पठियापाली एवं जामजोरी तक वन विभाग द्वारा स्वीकृत करीब 60 लाख रुपये की लागत वाली सड़क घटिया निर्माण कार्य की भेंट चढ़ गई है। निर्धारित मुरमीकरण कार्य के बजाय ठेकेदार ने केवल मिट्टी डालकर निर्माण अधूरा छोड़ दिया, जिसका खामियाजा अब बरसात में सैकड़ों ग्रामीण भुगत रहे हैं।
जैसे ही मानसून की बारिश शुरू हुई, यह सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गई है। झाबड़, पठियापाली और आसपास के कई गांवों के स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, मरीज और दैनिक आने-जाने वाले लोग बुरी तरह परेशान हैं। लोगों को कीचड़ से होकर निकलना पड़ रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और जरुरी आवाजाही तक बाधित हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस लापरवाही की लगातार कई बार शिकायत की गई। ग्राम पंचायत चांटीपाली के निवासियों ने जिम्मेदार अधिकारियों को पत्राचार और मौखिक रूप से अवगत कराया, मगर हर बार उन्हें ठेकेदार से संपर्क करने की सलाह देकर टाल दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की यह उदासीनता और ठेकेदार से सीधे मिलने का दबाव, भ्रष्टाचार को संरक्षण देने जैसा है।
स्थानीय लोगों का आक्रोश इस बात से और बढ़ा है कि हाल ही में सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान डोंगरीपाली में भी इस गंभीर समस्या को अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया था, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कार्रवाई की पहल नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही सड़क की मरम्मत एवं मुरमीकरण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अब उनकी उपेक्षा और अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं विभागीय अधिकारियों की चुप्पी ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर किसके इशारे पर इतनी बड़ी अनियमितता को नजरअंदाज किया जा रहा है? ग्रामीण इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में जनता को बार-बार ऐसी मुसीबत न झेलनी पड़े।




