रात्रे सॉ आरामिल अमुर्रा में औषधीय लकड़ी कहवा (अर्जुन) को चीर कर की जा रही दूसरे राज्य में तस्करी,करते है साल में लाखों का बिजनेश!

बरमकेला। राज्य सरकार ने कहवा की लकड़ी को औषधीय लकड़ी का दर्जा दिया है, लेकिन आरा मिल संचालक बेखौफ होकर कहवा लकड़ी की कटाई अपने आरा मिलो में कर रहे है। वन विभाग के अधिकारी आरा मिलों की जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का दावा करते है, बरमकेला क्षेत्र में रात्रे सॉ आरामिल में कहवा लकड़ीयों का थोक तदाक से भरा पड़ा है। लेकिन हकीकत विभागीय अधिकारियों के दावों से कोसों दूर है। प्रतिबंध के बावजूद जिले के आरा मिलों में प्रतिबंधित लकड़ी कहवा का खुलेआम आरामिल में कटाई करने के बाद फर्नीचर और दूसरे राज्य उड़ीसा सप्लाई करने में उपयोग किया जा रहा है।


हर माह आरा मिलों को जांच करने का नियम…
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार रेंज टीम को हर माह 4 आरा मिलों की जांच का लक्ष्य रहता है। लगातार रेंज की टीम अवैध रुप से लकड़ी लाने वालों पर नजर रखते हुए कार्रवाई भी करती है। जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ में सरिया बरमकेला से जिले के लकड़ी तस्कर प्रतिबंधित पेड़ कहवा को काटकर उसे बरमकेला रेंज के आरा मिल रात्रे सॉ (अमुर्रा जलगढ़) में खपा रहे है।
अफसर सूचना मिलने पर कार्रवाई करने का दावा कर रहे हैं।
तस्करी का गिरोह है एक्टिव…….
पेड़ तस्करों (कहवा) के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले एक्टविस्टों की मानें तो कहवा लकड़ी के कारोबार में अलग-अलग गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह के सदस्य आस पास के गांव से लकड़ी काटकर उसे आरा मिल तक पहुंचाते हैं। इन तस्करों से वन विभाग के कुछ कर्मचारी भी मिले हुए है, जो पैसों की लालच में प्रतिबंधित लकड़ी को बिना जांच के टोल नाकों में सेटिंग कर लकड़ी से भरी गाडिय़ों को उड़ीसा ,रायपुर के रास्ते पार करवाते हैं। पूरा गिरोह आरा मिल संचालक खगेश्वर रात्रे के इशारे पर चलता है और प्रतिबंधित लकड़ी आरा मिल में गिराने के बाद उनका भुगतान किया जाता है। आपको बता खगेश्वर रात्रे राजधानी के मंत्रालय में बैठने के धोन्स देते है जिससे की रेंजर, डीएफओ भी उनके आरामिल में जांच करने के लिए थर्राते है




