कोरबा

गांव के कोने से जमीन ने भरी उड़ान शासकीय जमीन पर लैंडिंग” मामले में RI ने टीम के साथ किया मौके का निरीक्षण,कौन कौन रडार में शामिल

कोरबा/  दादरखुर्द में ‘उड़ती जमीन’ के सनसनीखेज खुलासे के बाद अब प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। समाचार प्रकाशन और आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तहसीलदार ने राजस्व अमले को मौके पर उतरने के निर्देश दिए हैं।

उड़ती जमीन’ मामले में प्रशासन सख्त: तहसीलदार के निर्देश पर RI व पटवारी की टीम  द्वारा  मौके की भौतिक जांच किया गया ग्राम दादरखुर्द में सरकारी जमीन की हेराफेरी और निजी भूमि को कागजों में शिफ्ट करने के ‘महाघोटाले’ की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार कोरबा ने राजस्व निरीक्षक (RI) को विवादित स्थल का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के कड़े निर्देश दिए हैँ।
जांच का मुख्य केंद्र: खसरा नंबर 273 और 274
शिकायत के अनुसार, मूल रूप से ‘बोईरमुड़ा खार’ में स्थित निजी भूमि को जादूगरी दिखाते हुए मुख्य मार्ग की बेशकीमती शासकीय भूमि (खसरा नंबर 273, 274) पर दर्शा दिया गया है। अब राजस्व विभाग की टीम के द्वारा निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच किया गया:
मौका मुआयना: क्या मौके पर काबिज व्यक्ति वही है जिसका नाम राजस्व रिकॉर्ड में चढ़ाया गया है?
सीमांकन मिलान: पुराने नक्शों और वर्तमान स्थिति के बीच 2 किलोमीटर के अंतर का तकनीकी विश्लेषण।
दस्तावेजों की कूट रचना: वर्ष 2016 में धारा 89 के तहत पारित किए गए उस विवादित आदेश की वैधता, जिसके आधार पर यह पूरी शिफ्टिंग हुई।

राजस्व निरीक्षक द्वारा जारी आधिकारिक सूचना पत्र के अनुसार, 24 फरवरी 2026  विवादित भूमि पर जांच की प्रक्रिया शुरू किया गया। इस दौरान  निम्नलिखित पक्षों से उपस्थित थे:
कथित भू-स्वामी: पुरुषोत्तम राव घाडगे एवं हरिहर राव।
स्थानीय प्रतिनिधि: ग्राम दादरखुर्द के सरपंच और संबंधित वार्ड पार्षद।
राजस्व अमला: हल्का पटवारी और सीमांकन दल की उपस्थिति में बोइर मुड़ा का मौका निरीक्षण किया गया खसरा नंबर 1566, 1570, 1572 एवं अन्य शासकीय नंबरों का भी मिलान किया गया  मौके पर किए जांच जाँच में जो तथ्य सामने आए है के संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से  सामने नही आई है l उल्लेखनीय हैँ 1566, 1570, 1572 यह वही खसरा नंबर हैँ जो अपने भौतिक स्थान से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपए की बेशकीमती मुख्यमार्ग खरमोरा स्थित  शासकीय भूमि खसरा नंबर 273,274  पर लैंडिंग किया हैँ l

शिकायतकर्ता ने  इस मामले में केवल सुधार की नहीं, बल्कि आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि यह बिना विभागीय साठगांठ के संभव नहीं था। यदि भौतिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो तत्कालीन वरीय अधिकारी और तत्कालीन संबंधित पटवारी RI पर भी जांच की आंच आ सकती है।
प्रशासनिक रुख के कयास: सूत्रों के अनुसार, यदि भौतिक सत्यापन में दस्तावेजों और मौके की स्थिति में भिन्नता पाई जाती है, तो तत्काल प्रभाव से रिकॉर्ड को ‘शून्य’ घोषित कर सरकारी जमीन को शासन के मद में वापस लिया जाएगा।

KRISHNA MAHILANE

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