सारंगढ

झूठ और लूट का बड़ा बाजार ग्राम पंचायत पहंदा

फर्जीवाड़ा का बड़ा उदाहरण ग्राम पंचायत पहंदा

अपना जेब भरो कार्यक्रम में नंबर वन ग्राम पंचायत पहंदा

सारंगढ़:-सारंगढ़ जनपद क्षेत्र में ऐसे ऐसे पंचायतो की भरमार लगी हुई है। जहां भ्रष्टाचार का ताला लगा हुआ है अगर इसकी चाबी किसी के हाथों पर आ जाये तो पूरी काला चिठ्टाओ का सूची सामने आने से कोई रोक नही सकता। लेकिन जनपद सीईओ के पास तो दो-दो चाबी है लेकिन आखिर खोल क्यो नही रहे दरअसल सारंगढ़ जनपद पंचायत में 129 ग्राम पंचायत समाहित है जहां सभी पंचायतो को शासन से 14 वें वित्त योजना का आबंटन 2020 तक हुआ था। ये योजना प्रत्येक कार्यकाल में बढ़ते हुए चला जाता है। जैसे एक 5 वर्षीय कार्यकाल में 14 वे वित्त रहेगा तो दूसरे कार्यकाल में 15 वे वित्त योजना ऐसे ही बढ़ता हुआ जाता है। जिससे पंचायत को सीधे खाते में राशि मिलता है। जिसकी कोई मूल्यांकन,सत्यापन नही होता है। सीधा जिला पंचायत से जनपद पंचायत पर आती है। जनपद पंचायत से ग्राम पंचायत जाने के लिए जनपद पंचायत से डिजिटल सिग्नेचर की आवश्यकता होती है। जिसके बाद सीधा पंचायत खाते पर राशि का आबंटन हो जाता है। लेकिन डिजिटल सिग्नेचर करने वाले व्यक्ति भी लाजवाब होते है। बिना वेंडर के नाम पर भी डीएससी कर दे रहे है जिसको कमीशन के तौर पर जनपद के बाहर बैठे 2 अचूक नजर वालो से के पास फर्जी करने का दुकान खोल बैठा है। इनका चिठ्ठा अगला अध्याय में दिखाएंगे आपको। 14 वे वित्त योजना की राशि को शासन द्वारा ग्राम पंचायत में जनसंख्या के हिसाब से और विकास कार्यो के लिए दिया जाता है जिसमे मूलभूत सुविधाओं को भरपूर करना रहता है। पंचायत पर जैसे नाली निर्माण,बोरिंग बोर खनन,पचरी निर्माण,रोड निर्माण ,मरम्मद आदि जैसे कार्यो में विकास कार्य करवाया जाता है। जिसकी राशि का भुगतान किसी व्यक्ति विशेष नही भेज सकते । 14 वे वित्त की राशि को वेंडर के खाते में भेजा जाता है। जिससे पक्की बिल पंचायत को दिया जाता है जिसको जनपद पंचायत में शो किया जाता है।

वेंडर मतलब जिसके पास CGGST हो और उनके नाम पर कोई फर्म हो उसके खाते में पैसा ट्रांसफर करके वहां से सामान लिया जाता है”

ग्राम पंचायत पहंदा सरपंच श्रीमती पंकज बाई साहू है , जिसने वेंडर भुगतान न करवाके अपने खुद पंकज साहू के नाम पर भुगतान करवा दी है।

इसका आंशिक नियम होता है, जब तक वेंडर नही रहेगा तो सामग्री कैसे दे पाएगा जो उनके नाम पर राशि का आहरण करवा दिया गया।

कि उक्त संदर्भ में सरपंच के द्वारा अपने खुद के नाम पर गोटान में ट्रैक्टर द्वारा चारागाह में जोताई कार्य 26000/-, गोठान में खाद ट्रांसपोर्टिंग का भुगतान 45000/-, गोठन हेतु गाय कोठा निर्माण कार्य का भुगतान 45000/-, पचरी मरम्मत में सामग्री धुलाई का भुगतान 49000/-, शौचालय मरम्मत में सामग्री मजदूरी का भुगतान 49000/-, नल टप हेतु समान कार्य का भुगतान 70000/-,के नाम पर -भेजा तथा आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए पंचायत की राशि आहरित कर इसका उपयोग करते हुए व्यक्तिगत लाभ लिया गया । इससे सीधी सीधी अधिकारी की भी संलिप्त होने की खबर मान सकते है। क्योंकि जिसको कमीशन भेजा गया होगा या कमिशन कटने के बाद डिजिटल हुआ होगा। आखिर सवेंदनशील सीईओ के रहते हुए। इतने बड़े काला मटोल कैसे छिप गए कही कर्मचारी की मिलीभगत से अधिकारी तक फाइल जाते जाते भ्रष्टाचार कि दीमक ने सेंध तो नही मार लिया । अब पूरी जानकारी जांच के बाद ही कन्फर्म हो पायेगा लेकिन सचिव एव सरपंच के कार्यप्रणाली पर इतने बड़े भ्रष्टाचार की पन्ना कैसे दब गया इसमे कार्यवाही किया जाता है या पूर्व की भांति अभयदान करने के लिए टेबल के नीचे से चढ़ोत्तरी पहुच जाता है।

वही पिछले कुछ महीने में रोजगार सहायकों से छोटी सी मिस्टेक होने से उनकी सेवा समाप्त कर दिया गया। मनरेगा शाखा में पदस्त कम्प्यूटर ऑपरेटर और सहायक एपीओ को तत्काल गोपनीय प्रतिवेदन में आचरण छिपाकर समाप्त कर दिया गया। तो क्या सवेंदनशील सीईओ लाखों रुपये राशि को गबन करने वाले सचिव एव सरपंच के खिलाफ सेवा समाप्त करने की कार्यवाही करते है या उनको मौका दिया जाता है सुधार करने की, अगर उनको सुधारने की मौका दिया जाता है तो पूर्व में जिनकी सेवा समाप्त कर दिया गया उनको भी मौका देना था। लेकिन ऐसा नही हुआ इसलिए जनपद सीईओ की कार्यवाही करने की तरीका से गलत कार्य करने वाले चाहे कोई भी कर्मचारी हो कार्यवाही करते ही है। जनपद सीईओ से कार्यवाही के साथ साथ राशि वसूली करने की पालन प्रतिवेदन उच्च अधिकारी को भेज कर भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारियो की मनोबल को बढ़ने से रोके।

इसके अतिरिक्त प्रिय सॉफ्ट एव ऑनलाइन फोटो कॉपी प्रिंट 19000/-, सोक्ता गड्ढा हेतु मिट्टी मुरूम धुलाई 20000/-, मुरूम धुलाई भुगतान 20000/-, नाली साफ सफाई का भुगतान 48000/-, गली साफ सफाई का भुगतान 48000/-, गोठन हेतु चारा व्यवस्था का भुगतान 35000/-, गोठान में ट्रैक्टर द्वारा जुताई का भुगतान 19000/-, स्टेशनरी एव ऑनलाइन कार्य का भुगतान 45000/-, डाटा एंट्री एवं फोटोकापी A4 साइज का भुगतान 12000/-, मस्क सैनिटाइजर का भुगतान 18000/-, टॉप नल हेतु भुगतान 10000/-, प्रिय सॉफ्ट डाटा इंट्री ऑनलाइन कार्य 5000/-, तलाब सफाई नाली सफाई गली सफाई ट्रांसपोर्ट का भुगतान 17000/-, covid-19 हेंतु राशन समान कार्य भुगतान 50030/-, समान कार्य का भुगतान 196000/-, मिट्टी मुरूम धुलाई कार्य सोख्ता गड्ढा पुताई कार्य 20000/- ,का की राशि फर्जी तरीके से आहरित की गई है । जबकि धरातल में ऐसा कोई कार्य हुआ ही नहीं है ।

KRISHNA MAHILANE

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