होली से पहले 10,000 करोड़ की बरसात! विष्णु भैया ने किसानों के खाते में उड़ेल दिया ‘3100 वाला वादा’ – अब रोना-धोना बंद, सिर्फ ठुमके और रंगों की होली!

सारंगढ़_ बिलाईगढ़ 28 फरवरी 2026 – माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सुशासन सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वादा हमारा धर्म है, और किसान हमारा परिवार! आज दोपहर 2 बजे बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक के रहंगी में आयोजित ऐतिहासिक किसान सम्मेलन में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत 25 लाख 24 हजार 339 किसान भाइयों से खरीदे गए 141.04 लाख मीट्रिक टन धान पर कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य का पूरा अंतर एकमुश्त भुगतान कर दिया गया!कुल राशि? लगभग 10,000 करोड़ रुपये से अधिक – सीधे किसानों के बैंक खातों में, बिना किसी कटौती, बिना किसी भटकावे, बिना किसी राग-लपेट! होली से पहले यह धनवर्षा किसानों के चेहरे पर मुस्कान और घरों में खुशहाली के रंग भर रही है। पिछले दो वर्षों में 25,000 करोड़ से ज्यादा दिए जा चुके हैं, और अब यह 10,000 करोड़ जोड़कर कुल 35,000 करोड़ का आंकड़ा पार! यह कोई साधारण भुगतान नहीं – यह है किसानों का हक, सरकार का वादा और सुशासन की जीती-जागती मिसाल!कांग्रेस का कुशासन vs विष्णु का सुशासन – फर्क साफ दिख रहा है!
जब भूपेश बघेल का कुशासन था, तब कांग्रेस के अपने लोग भी सड़क पर थे – बिना काम, बिना पैसे, बिना इज्जत! भाई-भतीजावाद, घोटाले, गुंडागर्दी और लूट के सिवा कुछ नहीं मिला। कांग्रेसियों की भी तिजोरियाँ खाली, किसान कंगाल, और विकास ठप! यहां तक भूपेश बघेल, दीपक बैज, चरण दास महंत जी को भी भारी भरखम अंतर की राशि मिला।लेकिन आज विष्णु भैया के सुशासन में विरोधी भी मालामाल हो रहे हैं। ठेके-टेंडर, पोस्टिंग-प्रमोशन, धान खरीदी – सब कुछ पारदर्शी और खुले बाजार में! वही कांग्रेसी नेता जो कल चापलूसी और चोरी के सहारे जीते थे, आज सुशासन की छत्रछाया में तरक्की कर रहे हैं।जनता देख रही है, और 2028 में पूछेगी –
“मालामाल बनना है या हाल-बेहाल रहना है?”
जवाब साफ है – विष्णु का राज, विकास का राज!
उपसंहार में यही कहूंगा –
जो कहते हैं, वो करते हैं। जो करते हैं, वो निभाते हैं! विष्णु भैया ने साबित कर दिया – छत्तीसगढ़ में किसान अब रुदन नहीं, उत्सव मनाएगा! होली के रंगों के साथ अब खुशहाली के रंग भी घर-घर पहुंच रहे हैं। अन्नदाता मित्रों, ठुमके लगाओ, रंग बरसाओ – क्योंकि अब जेब भारी है, मन खुश है! विष्णुका_सुशासन,किसान_मित्र_विष्णु_भैया होली_की_बरसात,3100_का_वादा_निभाया।



