श्री राधाकृष्ण हॉस्पिटल(सारंगढ़)में एक 17 वर्ष के बच्चे को मिला नया जीवन दान हुआ बहुत ही जटिल बीमारी का सफल ऑपरेशन।

सारंगढ़:-सारंगढ़ का श्री राधा कृष्ण मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने इतिहास रचा है यहां के चिकित्सक एक ओर जहां सारंगढ़ के आसपास कहीं भी नहीं किए जाने वाले ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं तो दूसरी तरफ अस्पताल की प्रसिद्धि में भी इजाफा हो रहा है आपको बता दें सारंगढ़ में स्थित बड़ा हॉस्पिटल श्री राधा कृष्ण मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल जो रानी सागर के वार्ड नंबर एक पर स्थित है जिसमें सुप्रसिद्ध डॉक्टर जेपी बर्मन (जनरल सर्जन एवं लेप्रोस्कॉपी सर्जन)है जिन्होंने एक 17 वर्ष के बच्चे का पैंक्रियाज मे सिस्ट का ऑपरेशन करके उस बच्चे को एक नया जीवनदान दिया

जानें इसकी पूरी कहानी….
एक 17 साल का बच्चा जो निवासी सूखापाली डभरा जिला जांजगीर चांपा का है जो की 3 महीने पहले अपने बीमारी को लेकर बहुत परेशान था उसको पेट दर्द, बुखार,पेट भरा भरा, उल्टी जैसे लगता था जोकि उसके पिताजी कई जगह कई हॉस्पिटल पर इलाज करवाया पर उसको आराम नहीं मिला फिर 3 महीने के बाद एक मरीज के सलाह से जोकि इसी हॉस्पिटल पर इलाज करवा कर पूरी तरह से ठीक हो कर गए थे उन्हीं के सलाह से ये श्री राधा कृष्ण हॉस्पिटल आए आने के बाद इनको जेपी वर्मा सर को दिखाया गया सर ने इनको सिटी स्कैन तथा सोनोग्राफी की सलाह दिए सिटी स्कैन में पता चला कि बच्चे को पेनक्रियाज में एक सिस्ट बना हुआ है जिसका साइज 10×8 c.m है जबकि स्टमक के पोस्ट इंटीरियर सरफेस (लेजर सेक) में था जोकि बिना ऑपरेशन के ठीक नहीं हो सकता था चिकित्सक की सलाह एवं मरीज के घर वालों के सहयोग से ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया ऑपरेशन में स्विफ्ट को ऑपरेट करने के लिए पहले स्टमक के इंटीरियल एरिया को ओपन करना पड़ा फिर पोस्टेड एरिया में जाकर और स्टमक के लेयर को ओपन करके शिष्ट को बाहर करके आपस में जोड़ा गया इस पद्धति को सिस्टो गैस्टक टॉमी कहते हैं यह प्रोसीजर होने के बाद इंटीरियर सरफेस को वापस बंद कर दिया गया ऑपरेशन में इन सभी प्रोसीजर को करने में 2 से 3 घंटे का समय लगा और ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया इस प्रकार पूरी तरह से सफल रहा इस ऑपरेशन में डॉक्टर जेपी वर्मन सर डॉक्टर दीपक शर्मा सर एवं ओटी स्टॉप की अहम भूमिका रही ऑपरेशन के 5 दिन के बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया अब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है मरीज के परिजन ने इस बड़े ऑपरेशन के सफल होने पर खुशी व्यक्त करते हुए हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर निधु साहू एवं हॉस्पिटल के डॉक्टर और स्टाफ को धन्यवाद व्यक्त किया डॉक्टर जेपी बर्मन जी ने बताया की पहले 1 साल में ऐसे 50 से 100 मरीज आते थे लेकिन अब उनकी संख्या 200 से 300 तक पहुंच गई है
आइए श्री राधा कृष्ण मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सुप्रसिद्ध डॉक्टर जेपी बर्मन जी से इस बीमारी की संक्षिप्त जानकारी लेते हैं इस बीमारी के संक्षिप्त जानकारी के लिए इस पाठ को पूरा पढ़ें
क्या होता है पैंक्रियाज।

पैंक्रियाज को हिंदी में नाम अग्नाशय ग्रंथि कहते हैं. यह हमारे पाचन तंत्र का एक अहम हिस्सा होती है. करीब छह इंच लंबी यह ग्रंथि बहुत सारी कोशिकाओं से मिलकर बनी होती है. यह पेट, छोटी आंत, यकृत, प्लीहा और पित्त की थैली के बीच में होती है. पेट और रीढ़ की हड्डी के बीच में यह एक दम जकड़ी हुई होती है.
पैंक्रियाज एक लंबी नाशपाती जैसे आकार की होती है जिसका एक सिरा चौड़ा और दूसरा संकरा होता है. चौड़े सिरे को हेड और संकरे सिरे को टेल कहते हैं. बीच के हिस्से को नेक और बॉडी कहते हैं. शरीर की दो बहुत महत्वपूर्ण मेसेंटेरिक धमनी और मेसेंटेरिक नस पैंक्रियाज के एक हिस्से से होकर निकलती हैं. पैंक्रियाज के दो काम होते हैं. पहला खाना पचाना और दूसरा ब्लड शुगर को नियंत्रित करना.
कैसे काम करती है पैंक्रियाज
जब खाना पेट में पहुंचता है तो पैंक्रियाज में एक एंजाइम उत्पन्न होता है. इसे पैंक्रियाटिक जूस कहते हैं. यह खाना पचाने में मदद करता है. इसके अलावा पैंक्रियाज दो हार्मोन इंसुलिन और ग्लुकागॉन भी पैदा करती है. यह खून में मिलकर शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंचते हैं. इंसुलिन ब्लड शुगर लेवल को कम करता है वहीं ग्लुकागॉन ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है. ये दोनों मिलकर शरीर में ब्लड शुगर लेवल का संतुलन बनाकर रखते हैं.
क्या होता है पैंक्रियाटिक कैंसर
कैंसर की सीधी सी परिभाषा है- जब किसी भी अंग में कोशिकाओं में अनियंत्रित बढ़ोत्तरी होने लगती है तो वहां एक गांठ (ट्यूमर) बनने लगती है. ऐसा ही पैंक्रियाटिक कैंसर में भी होता है, जब पैंक्रियाज में कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं. इसका कारण होता है कि या तो नई कोशिकाओं के बनने पर भी पुरानी कोशिकाएं मर नहीं रही हैं या फिर जरूरत न होने पर भी शरीर में नई कोशिकाएं बन रही हैं. ऐसा होने पर वहां एक ट्यूमर बन जाता है. जरूरी नहीं है कि हर ट्यूमर से कैंसर हो. कुछ बस सामान्य गांठें भी हो सकती हैं. कैंसर के ट्यूमर को मैलिगनेंट ट्यूमर कहा जाता है क्योंकि यह जानलेवा होता है. कैंसर शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में भी फैल सकता है.
यह कैंसर भी दो तरह का होता है. एक्सोक्राइन और एंडोक्राइन पैंक्रियाटिक कैंसर. एक्सोक्राइन कैंसर पैंक्रियाटिक ग्लैंड (ग्रंथि) के अंदर होता है वहीं एंडोक्राइन ट्यूमर उस हिस्से में होता है जो हार्मोन पैदा करता है. अधिकांश लोगों को एक्सोक्राइन पैंक्रियाटिक कैंसर होता है. करीब 93 प्रतिशत लोगों को एक्सोक्राइन पैंक्रियाटिक कैंसर ही होता है. यह तेजी से फैलता है और जानलेवा होता है.
क्यों हो सकता है पैंक्रियाटिक कैंसर
डीएनए में बदलाव होना कैंसर का कारण बनता है. पैंक्रियाटिक कैंसर आनुवांशिक भी हो सकता है. मतलब यह परिवार से बच्चों में आ सकता है. धूम्रपान, शराब, ज्यादा लाल मांस और प्रोसेस्ड मांस खाना या मोटापा इसकी वजह हो सकते हैं. 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा ज्यादा होता है. महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में इस बीमारी के होने की आशंका अधिक होती है.
कैसे होते हैं इसके लक्षण
पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षण बहुत ही सामान्य से होते हैं. ऐसे में इन पर ध्यान भी नहीं दिया जाता है. जैसे पेट या पीठ में दर्द रहना, वजन का कम होते जाना, पीलिया होना, भूख न लगना, जी मिचलाना, डायबिटीज और अग्नाश्य में सूजन आना. अगर लगातार ऐसे लक्षण दिखाई दें तो यह पैंक्रियाटिक कैंसर का संकेत हो सकता है. पैंक्रियाटिक कैंसर के बढ़ जाने पर शरीर के कई हिस्सों से खून आ सकता है!अक्सर लोगों में नाक से खून आना देखा गया है!
इन लक्षणों को कभी हल्के में न लें और नजर अंदाज न करे
पेंक्रियाज कैंसर के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जी-घबराना, उल्टी होना, पीलिया, अपच की समस्या, अचानक से वजन कम होने लगना, भूख कम लगना, नाक से पानी आना, उल्टी होना, शरीर में ग्लूकोज लेवल कम या अधिक होने से चक्कर या थकाना आना। कुछ गंभीर मामलों में दिमाग में ग्लूकोज की पर्याप्त मात्रा न पहुंचने पर व्यक्ति बेहोश होने के साथ कोमा में भी जा सकता है। ऐसे लक्षण दिखे तो तुरंत संबंधित डॉक्टर से सलाह लें!
हमारे यहां अन्य कोई बीमारी हो तो आपको इससे घबराने की जरूरत नहीं है बस सही समय में विशेषक चिकित्सक के सलाह से समय पूर्व भर्ती हो जाइए ताकि समय रहते समुचित उपाय किया जा सके! हमारे यहां गंभीर जोखिम भरा और जटिल परिस्थिति में भी मरीज का इलाज सफलतापूर्वक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और आधुनिक संसाधनों के द्वारा किया जाता है! इसीलिए सभी जरूरतमंद से आग्रह है कि जब भी आपको या आपके परिजनों को कुछ भी बीमारी के लक्षण लगे तो डायरेक्ट हॉस्पिटल से संपर्क करके उचित सलाह ले सकते हैं हमारा लक्ष्य मरीज की सुरक्षा है!
हॉस्पिटल और विशेषज्ञ चिकित्सक के सीधे संपर्क में रहने से बीमारी की गंभीरता को समय पूर्व पता कर हम आपकी प्रभावी तरीके से मदद कर सकेंगे! हम पर विश्वास जताने के लिए आप सभी का पुनः धन्यवाद और क्षेत्र की जनता को समुचित आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेंगे !मरीज की सुरक्षा सहायता और विश्वास ही हमारा पूर्णता उद्देश्य एवं लक्ष्य है!





