सारंगढ

आ जाओ कन्हैया मेरे आ जाओ कन्हैया संकट  में गोपिकाएं खतरें में गैया – साहित्यकार गिरीश पंकज…

संकेत साहित्य समिति द्वारा-  काव्य गोष्ठी”

लक्ष्मीनारायण लहरे

रायपुर ।वृंदावन हॉल रायपुर में दिनांक 20 जनवरी को भाषाविद् एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चितरंजन कर की अध्यक्षता एवं लब्धप्रतिष्ठ व्यंग्यकार गिरीश पंकज, मीर अली मीर एवं सुरेंद्र रावल के विशिष्ट आतिथ्य में संकेत साहित्य समिति के तत्वावधान में नववर्ष सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के आरंभ में माँ सरस्वती की पूजा अर्चना के पश्चात समिति द्वारा एवं कवि छबिलाल सोनी द्वारा अतिथियों ,विजय मिश्रा अमित एवं लक्ष्मी नारायण लहोटी का अंगवस्त्र, मोतियों की माला एवं श्रीफल से सम्मान किया गया। संकेत साहित्य समिति के संस्थापक एवं प्रांतीय अध्यक्ष डॉ माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने स्वागत उद्बोधन में संमिति की दीर्घकालीन साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई भी साहित्य समिति कवियों एवं कवयित्रियों के लिए बौद्धिक विकास एवं रचनात्मक विकास की कार्यशाला होती हैं। डॉ.चितरंजन कर ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती । जो सीखना बंद कर देता है , जो व्यक्त कर देता है वह व्यक्त नहीं कर पाता। गिरीश पंकज ने कहा कि काव्य गोष्ठियों से नये सृजन को बल मिलता है।  साहित्यिक वातावरण च़ितन के लिए मस्तिष्क की उर्वरता को बढ़ाता है। सुरेन्द्र रावल ने विभिन्न प्रकार के लोगों को खूबसूरती से रेखांकित किया। सुपरिचित कवयित्री पल्लवी झा के सफल संचालन में जिन कवियों एवं कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया उनमें – डॉ.चितरंजन कर , गिरीश पंकज , डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, डॉ.सुधीर शर्मा, मीर अली मीर, सुरेन्द्र रावल,महेश कुमार शर्मा,डॉ.सिद्धार्थ कुमार श्रीवास्तव, डॉ.दीनदयाल साहू, पल्लवी झा,सुषमा पटेल,पूर्वा श्रीवास्तव, शकुंतला तरार, गोपाल जी सोलंकी, छबिलाल सोनी, राजेश अग्रवाल, डॉ.रविन्द्र सरकार, हरीश कोटक, माधुरी कर, रीना अधिकारी, दिलीप वरवंडकर, शिवशंकर गुप्ता,मन्नु लाल यदु , लवकुश तिवारी, यशवंत यदु , देवाशीष अधिकारी, चेतन भारती, बानीब्रत अधिकारी, राजकुमार सोनी, अर्चना श्रीवास्तव,रामचंद्र श्रीवास्तव, राजेन्द्र रायपुरी, रूपाली चक्रवर्ती, विवेक रहाटगाँवकर , समायरा पटेल, ज्योति रहाटगाँवकर,नितेश ठाकुर ‘नीर , लालजी साहू,कुमार जगदली, गोपाल सोलंकी, अंबर शुक्ला ‘अंबरीश’,राजेन्द्र ओझा,एकता शर्मा, अनीता झा,राकेश अग्रवाल, विपुल तिवारी, आशा पाठक, नीलिमा मिश्रा, माधुरी कर , कल्याणी तिवारी, एवं गणेश दत्त झा के नाम प्रमुख हैं। नववर्ष के उपलक्ष्य में नयी चेतना, नयी परिकल्पना एवं नयी विचारधाराओं से संबंधित पढ़ी गईं रचनाओं के प्रमुख अंश निम्नानुसार हैं-
● महाकाव्य लिखकर दिखलाऊँ,अपने प्रभु में मैं रम जाऊँ।
तुलसी बनकर ग्रंथ सुनाऊँ, रघुवर को उर में बैठाऊँ।।
पल्लवी झा (रूमा)
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● खुद को बेचना चाहा,
तो किसी ने खरीदा नहीं….
जमीर बेच कर आया,
तो खुद ब खुद बिक गया मैं ….
नितेश ठाकुर ” नीर ”
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●  निःस्तब्ध पथ, नीरव जगत
जागे एक प्राणी।
नाम उसका हरि, हमारे प्रहरी
तस्कर – त्राणी।।
– डॉ रविंद्रनाथ सरकार
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●  आसमान नील रंग, देख राधिका उमंग,
साँवरे सुजान कृष्ण, बाँसुरी बजाइए।
चाल है मलंग मस्त, मोहते कमान शस्त्र,
देख काम कोटि रूप, राधिका बुलाइए।- -सुषमा प्रेम पटेल
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● जीते जी कोई पूछ परख नहीं मरने पर सब याद करें। संकट में कोई मिला न मुझसे मरने पर सभी विलाप करें।
– शिवशंकर गुप्ता, रायपुर
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● सच्चा यदि एक है तो झूठे  हैं पूरे सात ,झूठे ही मिलकर करते हैं एकता की बात  ।
रीना अधिकारी
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● मान होवय तिरंगा के,
जन जन एकर गीत गालव जी।
देश के मान बढ़ाए खातिर,
घर घर एला लहरालव जी।
डॉ.दीनदयाल साहू
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● कल खल निनादिनी, रजतवर्नी ,नवयौवना,
स्वगर्या ,महानदी, महानदी ,कहाँ चली,कहाँ चली ,कहाँ चली…
डॉ.सिद्धार्थ कुमार श्रीवास्तव
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● पहाड़ों पर्वतों से टकराती नदियां सी होती है बेटियां।
धनिया पदीना मीठी नीम की पत्तियां सी होती हैं बेटियां।
विजय मिश्रा ‘अमित’
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● उत्तर में हिमाला है।
सिर मुकुट निराला है।
दक्षिण में चरण धोता,
सागर विकराला है
रामचन्द्र श्रीवास्तव
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● एक ही नारा, एक ही नाम, जय श्री राम, जय श्री राम।
पुण्य प्रतापी एक ही धाम, जय श्री राम, जय श्री राम।
अर्चना श्रीवास्तव
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● केवट,निषाद,शबरी,वनप्राणी, सबका मान बढ़ाया था।
अयोध्या से चले राम ने, समरसता का पाठ पढ़ाया था।
लवकुश तिवारी
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● झुक जाने से कोई इंसान छोटा नहीं बड़ा हो जाता है
जितना जो शांत रहता है उतना ही विनम्र हो जाता है
राजकुमार सोनी
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● सिरमन सज्जन कर जोड़ -जोड़ मैं करुँ अभिनन्दन कुत्ते का
साहब अंदर बंगले में गेट पर नाम लिखा है कुत्ता के
-कुमार जगदली
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● पहलगाम की सुरम्य वादियां
पीड़ा से चीत्कार उठीं,
आतंकियों के हमले से
मानवता धिक्कार उठी l।
पूर्वा श्रीवास्तव
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●  अगोर  ले पुरवाई नवा गाँव बनन दे, छरियाय किसनहा के एके छांव परन दे, समे हा मलो लेथें 
चेतन भारती
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● नारी  से  नर  शोभित  हैं
सुन ले  ये सकल  जहान ।
नारी  बिना  अपूर्ण  सभी
सब जीव  जगत भगवान ।
– छबि लाल सोनी
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● वह हमेशा सफेद कपड़े पहनतीं थीं/
एकबार इसके बारे में मैंने पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया – “कन्ट्रास्ट” और एक तरफ इशारा किया। इशारे वाली जगह पर उनका काले बाल वाला कुत्ता खड़ा था।
राजेंद्र ओझा
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● जाने कितनी नदियों से मिल एक समुंदर बनता है
बिखरे सपनों से जुड़ कर ही कोई मुक़द्दर बनता है
डॉ.सुधीर शर्मा
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● झन पुंछ काबर लिखना जरूरी हे
जिंदा हन आज ए खातिर लिखना जरूरी हे
सब्बो झन चाहे दुनिया के दरद हम लिखन
हम त हवन संदेसिया फेर लिखना जरूरी हे
विवेक कुमार रहाटगांवकर
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●  स्वार्थ की खातिर संबंधों का नित-नित रूप बदलते देखा ।
मनुहारों की भाषा कहाँ यहाँ अपनों को ही छलते देखा ।।
शकुंतला तरार 
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● ये चमन देख लो, ये गगन देखलो
देखना है तो मेरा वतन देख लो
अमन के लिए देश धर्म निभाते हैं
गाते हैं वन्देमातरम गाते हैं
=मीर अली मीर
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● किसी बात की अब तमन्ना नहीं है ,
मुझे जो खरीदे वो धन्ना नहीं है ।
उसे हर घड़ी मैं पलटता नहीं हूँ ,
जो मेरी कहानी का पन्ना नहीं है ।
– डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’
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● आ जाओ कन्हैया मेरे,
आ जाओ कन्हैया।
संकट में गोपिकाएँ,
खतरे में है गैया।
– गिरीश पंकज
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● सत्कर्मों ने केवल मुझको मालाएँ पहनाईं,
धूलों ने चलना सिखलाया सच्ची राहों में।
– डॉ. चितरंजन कर
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कार्यक्रम के अंत में डॉ.दीनदयाल साहू  ने आमंत्रित अतिथियों एवं रचनाकारों के प्रति संकेत साहित्य समिति की ओर से आभार व्यक्त किया।

KRISHNA MAHILANE

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